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यह मंत्र बताता है कि सृष्टि के आरंभ में केवल वह प्रकाशमय परमात्मा ही था। वही सबका स्वामी है, इसलिए हमें उसी की भक्ति करनी चाहिए।
वह अपनी महिमा से इस चर-अचर जगत का एकमात्र राजा है। वह मनुष्यों और पशुओं का रक्षक है।
वह ईश्वर हमारा भाई, पिता और विधाता है। वह समस्त लोकों को जानता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
हे प्रजापति! आपके अलावा कोई और इन समस्त पदार्थों को उत्पन्न करने में समर्थ नहीं है। हमारी मनोकामनाएं केवल आपकी कृपा से पूर्ण हों।
यह ग्रंथ "ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना" के उन 8 प्रमुख वैदिक मंत्रों पर आधारित है, जो मनुष्य को ईश्वर के साथ जोड़ने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग बताते हैं।
ये मंत्र केवल रटने के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के गुणों को अपने भीतर उतारने के लिए हैं। दैनिक जीवन में इनका पाठ मन को शांति और बुद्धि को शुद्धि प्रदान करता है।
यह अंतिम प्रार्थना है कि हे प्रकाशस्वरूप प्रभु! हमें ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए सन्मार्ग पर ले चलें। हमारे भीतर के कुटिल पापों को दूर करें।
जिसने आकाश, पृथ्वी और सूर्य को स्थिर किया है, वह आनंदस्वरूप परमात्मा ही हमारे लिए पूजनीय है।